शनिवार 13 जून 2026 - 07:01
अहले बैत (अ) के शिया इस्लामी भाईचारे और उख़ुव्वत पर यक़ीन रखते हैं

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद सदरुद्दीन क़ब्बांची ने कहा कि अहले बैत अ.स. के शियो ने मूसिल और अल-अनबार की आज़ादी के लिए जंग लड़ी और इस राह में हज़ारों शहीद पेश किए। इसकी वजह यह है कि अहले बैत (अ) के शिया इस्लामी उख़ुव्वत पर ईमान रखते हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , नजफ़ अशरफ़ के इमाम ए जुमा सय्यद सदरुद्दीन क़ब्बांची ने 12 जून 2026 के जुमा के ख़ुत्बों में कहा कि इमाम ख़ुमैनी ने इस्लामी एकता की दावत दी थी और आयतुल्लाह सिस्तानी ने फ़रमाया था,उन्हें केवल हमारा भाई न कहो, बल्कि अपना ही समझो। इसी सोच की बुनियाद पर ग़ज़्ज़ा के मज़लूम मुसलमानों की हिमायत को भी एक सकारात्मक क़दम क़रार दिया गया।

उन्होंने इराक़ी प्रधानमंत्री के अमेरिका दौरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि उम्मीद की जाती है कि वह इराक़ की तेल आय पर लगी पाबंदियों को समाप्त करने की मांग करेंगे, क्योंकि इराक़ की 95 प्रतिशत से अधिक तेल आय अमेरिकी फ़ेडरल बैंक में जमा होती है। जबकि इराक़ संयुक्त राष्ट्र के अध्याय-7 से निकल चुका है, इसलिए इराक़ी वित्तीय संसाधनों पर मौजूद रुकावटों को समाप्त किया जाना चाहिए।

इमाम ए जुमआ नजफ़ अशरफ़ ने विश्व फ़ुटबॉल कप के आग़ाज़ और एक मुहर्रम को इराक़ी टीम के मैच का स्वागत करते हुए कहा कि इराक़ अमन और खेल से मोहब्बत करने वाला मुल्क है। वह दुनिया को यह पैग़ाम देना चाहता है कि इराक़ एक स्थिर और सुरक्षित देश है, जिसकी जनता तमाम क़ौमों के लिए अपने दिल खुले रखती है। उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कामयाबी के लिए नेक ख़्वाहिशात का इज़हार भी किया।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सदरुद्दीन क़ब्बांची ने कहा कि अहले बैत (अ) के शियो ने मूसिल और अल-अनबार की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी और इस राह में हज़ारों शहीद पेश किए, क्योंकि वे इस्लामी भाईचारे पर विश्वास रखते हैं। क़ुरआन करीम फ़रमाता है:

“बेशक तमाम मोमिन आपस में भाई हैं।”

रसूले अकरम (स) ने फ़रमाया:

जो व्यक्ति मुसलमानों के मामलों की फ़िक्र न करे, वह उनमें से नहीं है।”

इसी तरह हज़रत इमाम अली ने फ़रमाया:

लोग दो प्रकार के हैं; या तो वे दीन में तुम्हारे भाई हैं या सृष्टि में तुम्हारे जैसे इंसान।

उन्होंने मुहर्रमुल हराम के आगमन के मौक़े पर रसूले अकरम (स) की इस हदीस का भी ज़िक्र किया:अल्लाह उस व्यक्ति से मोहब्बत करता है जो हुसैन से मोहब्बत करता है।

उन्होंने कहा कि यह हदीस शिया और अहले सुन्नत दोनों की मोतबर किताबों में मौजूद है।

हुज्जतुल इस्लाम क़ब्बांची ने आगे कहा कि इस्लाम इंसान को केवल विचार या कर्म तक सीमित नहीं रखता, बल्कि सही भावनात्मक लगाव और मोहब्बत को भी ईमान का बुनियादी हिस्सा मानता है। इसी लिए हदीसों में आया है:
ईमान की सबसे मज़बूत कड़ी अल्लाह के लिए मोहब्बत और अल्लाह के लिए नफ़रत है।

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